यूपी के एक प्राइमरी स्कूल जो चुनौती दे रहे कॉन्वेंट स्कूलों को

यूपी के एक प्राइमरी स्कूल जो चुनौती दे रहे कॉन्वेंट स्कूलों को ।

यूपी के एक प्राइमरी स्कूल जो चुनौती दे रहे कॉन्वेंट स्कूलों को ।

प्राइमरी स्कूलों की दुर्दशा और पब्लिक स्कूलों के बाजारीकरण के दौर में समाज के उस निम्न तबके लिए ये बड़ा चिंता का विषय है कि वह कैसे कॉन्वेंट जैसे स्कूलों को मोटी फीस देकर देश के भविष्य को बेहतर शिक्षा का इंतजाम कर सके।

यह स्कूल उत्तर प्रदेश के संभल जिला स्थित इटायला माफी में है। आप इस स्कूल में जाएंगे तो आपको हर ओर हरियाली मिलेगी। साफ सुथरा स्कूल, किचन, कमरों के जगमग करती सोलर लाइट। अगर हमारे प्राइमरी स्कूल ऐसे हो जाएं तो शायद गांव और इलाके का कोई शख्स अपने बच्चों को महंगे कॉन्वेंट स्कूलों में भेजना चाहेगा।

उत्तरप्रदेश के शिक्षा विभाग ने इस स्कूल को प्रदेश के मॉडल स्कूल का दर्जा दिया है। 308 बच्चों की संख्या वाले इस प्राइमरी स्कूल में दा‌खिले के लिए पहले से ही लंबी लाइन लगी है।

पाकबड़ा क्षेत्र के गांव लोधीपुर राजपूत निवासी कपिल कुमार 3 अगस्त 2010 में जिला सम्‍भल के इटायला माफी प्राइमरी स्कूल में तैनात हुए। उस वक्त स्कूल में कुल 25 बच्चे थे। 14 जुलाई 2015 में कपिल को इसी स्कूल में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी मिली।

जुनूनी कपिल ने अपने स्कूल को पब्लिक स्कूलों से बेहतर बनाने की ठान ली और अपने मिशन में जुट गए। कपिल कुमार मलिक ने बताया कि वे अब तक अपने खर्चे से 12 लाख खर्च कर चुके हैं।

कपिल ने बताया कि स्कूल में हरियाली के लिए करीब 300 गमले लगाए गए हैं साथ ही 1000 पौधे लगे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पोस्टिंग यहां 2010 में हुई थी। तब यहां 30-32 बच्चे पढ़ने के लिए आते थे।

बकौल कपिल स्कूल में हाइटेक कंप्यूटर लैब बनाई गई है। प्रोजेक्टर और थ्री डी पिक्चर्स से बच्चों को पढ़ाया जाता है। टीचर लर्निंग मैथड के जरिए बच्चों को पढ़ाया जाता है। दोपहर के बाद बच्चों को प्रैक्टिकल कराया जाता है।

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Office

स्कूल में बायोमेट्रिक सिस्टम से बच्चों की उपस्थिति होती है। स्कूल कैंपस में सुंदर हराभरा लॉन भी बनाया गया है। स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। प्रत्येक क्लास में स्पीकर लगे हुए जिसके जरिए शिक्षक बच्चों से किसी भी क्लास से संपर्क कर सकते हैं। कपिल ने निजी स्कूलों की तर्ज पर अपने स्कूल के बच्चों को टाई-बेल्ड और आई कार्ड उपलब्‍ध कराया है।

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Class

ऐसी है इस स्कूल की रसोई

इतना ही नहीं बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनका शरीर तंदरुस्त रहे इसलिए विद्यालय में खेल कूद के सामान भी उपलब्ध हैं। इस विद्यालय में बाकी प्राथमिक विद्यालयों की तरह एक रसोई घर भी है लेकिन वो बाकी विद्यालयों की तरह कतई नहीं लगता। साफ सुथरे बर्तन, खाद्य पदार्थों के बंद डिब्बे और दीवारों पर लगी टाइल्स यह एहसास ही नहीं होने देता कि हम यूपी के किसी प्राथमिक विद्यालय में हैं। कपिल बताते हैं कि सरकार की ओर से उन्हें विद्यालय के मेंटनेंस के लिए 5,000 रुपए और पुताई के लिए 6,500 रुपए मिलते हैं। स्कूल में हर माह चिकित्सक आकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हैं और यहां मासिक परीक्षा भी कराई जाती है।

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For information see full  video ,Coverd by The Lallantop.

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